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हमारा मनुष्य जीवन (our human life)

 यूं तो कहने हमारा जीवन बहुत छोटा है सा है परंतु कई बार हमारे इस जीवन में ऐसे उतार चढ़ाव आते जिससे परेशान होकर दुनिया में कोई न व्यक्ति आपने इस अमूल्य जीवन को समाप्त करना चाहता है क्योंकि कई बार हमारे जीवन में परेशानियां इतनी बढ़ जाती है की हम उन परेशानियों का सामना करने के बजाय अपने जीवन को समाप्त करना ही उचित समझते हैं बहुत कम लोग ही इन परेशानियों से लड़कर अपना जीवन सामान्य रूप से चला पाते हैं ।








वैसे तो आज के समय में सबका अपना जीवन ही और सब उसको अपने हिसाब से जीना चाहते हैं कोई भी व्यक्ति यहां नहीं चाहता की उनके जीवन में कोई भी दखल करें और सबके जीवन को समस्या भी अलग अलग होती हैं परंतु आज में आपको हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और जीवन जीने के लिए अत्यंत आवश्यक शादी के बारे मैं चर्चा करना चाहता हूं।





हमारे भारत देश में शादी को अलग अलग संप्रदाय में अलग अलग नमो से जाना जाता है परंतु आज के समय में हमारे समाज ने इस रिश्ते को मजाक बनाकर रख दिया है शादी एक हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो पति पत्नी के विश्वास पर चलता है परंतु आज के समय में हमारा वही जीवन भर का रिश्ता कुछ गलत फैमियो की वजह से पल भी में ही टूट जाता है चाहे वह गलत फेमी किसी भी बात को वजह से हुवि हो पर में मानता हूं की गलती हमेशा आदमी की हो ये संभव नहीं है कुछ गलतियां औरत से भी होती हैं अपनी बात को सही साबित करने के लिए पत्नी अपने पतियों से लड़कर अपने घर चली जाती है जिसके कारण बाद में उन्हें बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है चाहें बात कोई भी हो परंतु उनके मां बाप का फर्ज़ उनको समझने का है परंतु कुछ मां बाप इसका उल्टा करते हैं जिस के कारण घर की बात कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाती है अगर वास्तविकता देखी जाए तो कचहरी में भी पहले तीन चरणों तक पति पत्नी को समझाया जाता है ताकि वह साथ रहे सकें परंतु यदि उस समय भी वहा दोनो नही मानते तो केस कोर्ट मैं चला जाता है जहां पर  ज्यादातर यही परिणाम सामने आता है कुछ सालो बाद दोनो मैं समझौता हो जाता है इ परंतु इस सब में जितना पैसा और समय बर्बाद होता है इसका कोई हिसाब नहीं है।







आप सभी को यह भी  ज्ञात है ज्यादातर  मामलों में कोर्ट महिलाओं की ही सुनता है चाहें वह कितनी भी गलत क्यूं ना हो इसी बात का फायदा उठा कर कई बार पत्नी अपने पति पर मारपीट देहेज कई प्रकार के कैसे दर्ज करवा देती हैं जिसके कारण पति और उसके परिवार को जेल भुगतनी पड़ती हैं और जब सच सामने आता है उस समय बहुत देर हो जाती हैं कुछ पत्नियां आपने घर वालो के कहने पर अपने पति के खिलाफ ऐसे केस दर्ज करवा देती है परंतु वह ये बात भूल जाती है की मां बाप भी उसके कब तक रहेंगे दूसरी शादी करना भी आज के समय में आसान नहीं है अगर कोर्ट केस के बाद उनका तलाक हो जाए तो वहां कहा की रह जाएंगी या आगे क्या करेगी रही बात बच्चो की यह भी जरूरी नहीं है की तलाक के बाद बच्चे उसी के साथ रहें कभी कभी हमेशा के लिए पति के पास भी रहते हैं ना जाने आज के समय ऐसे ही कितने केस कोर्ट मैं भरे पड़े हैं जिसका इतने सालो तक कोई भी समाधान नहीं हुआ है। 



मेरे कहने का तात्पर्य आपसे यहीं है यदि पति पत्नी के बीच आपस मैं कोई भी मतभेद होता है तो उसे आपस मैं और परिवार वालों के साथ मिलकर सुलझाए कोर्ट मैं जाने का कोई भी मतलब नहीं बनता ।


वन अनुसंधान सस्थान (FRI)

 दोस्तों पिछले चरण में हमने वन अनुसंधान संस्थान तथा उस में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के विषय में पढ़ा था कि किस तरह से भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में कार्य कर रहे कर्मचारी यूनियन वालो की वजह से बेरोजगार हुए तथा आज के समय में वन अनुसंधान संस्थान में यूनियन वालों की वजह से दो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी आ गई है जो संस्थान के लिए सही नहीं है दो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी किसी भी संस्थान में नहीं है मेरा निदेशक महोदय से कहना है कि कृपया करके जल्द से जल्द यूनियन के कर्मचारियों को भी संस्थान से हटाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति द्वारा उत्पन्न ना हो।









आज उसी चरण को आगे बढ़ाते हुए हम भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में हुई भर्तियों की धांधली के बारे में चर्चा करेंगे जैसा कि आप सभी को ज्ञात है भारतीय वन अनुसंधान संस्थान नियमित तौर पर भर्ती निकालता रहता है जिससे कि जल्दी से जल्दी जल्दी कर्मचारियों  की कमी पूरी हो सके कुछ दिनों पहले ही भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में बहुत सी भर्तियां  लिए आवेदन मांगे हैं जिसके अंतर्गत एमटीएस,  लैब असिस्टेंट ,टेक्नीशियन आदि पद है ।






मैं आपको एक बात बताना चाहूंगा इससे पहले भी भारतीय वन अनुसंधान संस्थान ने जितने भी भर्तियां कराई है उन सभी भर्तियों में कुछ ना कुछ कमी हमेशा पाई जाती है इसी के चलते वन अनुसंधान संस्थान ने कुछ पदों के लिए दोबारा पेपर भी कराए हैं इससे पहले जो पेपर हुए थे उसमें बहुत से आवेदन करता ब्लूटूथ से नकल करते हुए पाए गए उनके खिलाफ़ वन अनुसंधान संस्थान ने क्या कार्यवाही की सबसे बड़ा सवाल यहां है ?






तथा उसमें जो भी चयनित अभ्यर्थी थे उनको अभी तक भारतीय वन अनुसंधान की और से जोइनिंग नहीं दी गई निदेशक महोदय से मै यही बात पूछना चाहता हूं जब अभी तक आपने परीक्षा में सफल हुवे अभ्यार्थियों को जॉइनिंग नहीं दी हे तो आपने नई भर्तियां किस तरह से निकाली ?



इसी प्रकरण में उत्तराखंड क्रांति दल के एक वरिष्ठ नेता ने बहुत सही बयान दिया था जो सत प्रतिशत सही है जितनी भी बार वन अनुसंधान संस्थान ने भर्तियां करवाई है उनमें सारे पेपर अपने आप ही तैयार किए हुए हैं जिसके चलते  संस्थान में उनके करिबी लोगों का आसानी से सिलेक्शन हो जाता है और वही प्रक्रिया आज के समय में भी चल रही है जिसकी वजह से योग्य उम्मीदवारों को उनका हक नहीं मिल पाता बीच में संस्थान में ऐसे लोगों का भी सिलेक्शन हुआ है जिनको  अपना नाम तक लिखना नहीं आता तो उन्होंने क्या पेपर की तैयारी की होगी ?






यदि इसी क्रम को आगे बढ़ाया जाए तो वन अनुसंधान संस्थान में जीआरएस एसआरएस व पीएचडी स्कॉलर के लिए भी पेपर होते हैं तथा इंटरव्यू रखे जाते हैं परंतु सिलेक्शन उन्हीं का होता है जिनकी जान पहचान अच्छी होती है बाकी सब का पेपर मैं होना नहीं होना एक बराबर है इसकी वजह क्या है ?





मेरा निदेशक महोदय से बस यही कहना है यदि आप लोग यूके एसएससी यूकेपीएससी के अंतर्गत भर्तियां करवाए तो योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिलेगा । 2013 से लेकर अभी  तक भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में हूवी भर्ती की विजिलेंस जाज कराई जाए।

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (forest research institute)


अनुसंधान संस्थान देहरादून वैसे तो विश्व का सबसे बड़ा संस्थान है परंतु आज के समय जो यह हो रहा हैं वो आज तक कभी नहीं हुआ इसी चीज को देखते हुए आज मुझे विक्रम बेताल शो की एक बात याद आ गई समय परिवर्तनशील है किस का समय कब बदल जाय कुछ बोल नहीं सकते वन अनुसंधान संस्थान ने संस्थान मैं सरकारी कर्मचारियों की कमी होने के कारण कार्य करने हेतु प्राइवेट सिक्योरिटी सर्विस से कॉन्टैक्ट  और संविदा पर कर्मचारी रखा।






अब आपको यह जानना बहुत जरूरी है की संविदा और कॉन्टैक्ट मैं क्या अंतर है संविदा कर्मचारी वह कहलाते हैं जिनको संस्थान पहले से नियम एवं शर्तें रख कर कार्य में रखते है तथा उन्हें प्रत्येक वर्ष के बीच में 1 महीने का विराम मिलता है जिससे वह  अदालत में नियमित होने की मांग ना कर सकें और संस्थान  स्वयं से उनकी तनखा नियमित रूप से देता हैं। 20000से 30000 और उन्हें नियमित कर देता है अब बात आती है कांटेक्ट स्टाफ की यहां वहां लोग होते हैं जो किसी कंपनी के अंतर्गत कार्य करते हैं और उनकी तनखा कंपनी देती है और उनका संस्थान से कोई मतलब नहीं होता परंतु आज के समय में एफ आर आई जो भी हो रहा है वह बहुत गलत है सन 2019 में एफ आर आई के कांटेक्ट कर्मचारियों ने अपनी एक यूनियन का निर्माण किया अगर यही चीज देखी जाए तो किसी भी सरकारी संस्थान में जो व्यक्ति भी कांटेक्ट पर कार्य कर रहे हैं या किसी कंपनी के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं वह यूनियन नहीं बना सकते । 




किस प्रकार इस यूनियन का निर्माण अवैधानिक तरीके से हुआ यह जो भी कर्मचारी से जुड़े उन्होंने आगे चलकर कोर्ट में केस डाल दिया जबकि वह कंपनी से आदमी थे ना कि एफ आर आई के उस यूनियन को बने आज 3 साल पूरे हो गए हैं तथा उसमें शामिल सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं अब बात करते हैं भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में हाल ही में क्या हुआ मार्च 2022 में बजट ना होने के अभाव में कांटेक्ट के कर्मचारियों को निकालना शुरू किया गया इसमें जितने भी यूनियन के कर्मचारी थे उनको छोड़कर बाकी सब को निकाला गया मैं मैम से बस एक बात पूछना चाहता हूं सब कर्मचारी आपके लिए एक तरह है तो आपने यूनियन वालों को क्यों नहीं निकाला इसी को और यूनियन वालो के लिए बजट कहा से आया देखते हुए मार्च 2022 में एक और यूनियन का निर्माण  हूवा जिसमें बहुत सारी अप्रिय जनक बातें हूवी और एफ आर आई के मुख्य गेट मै धरना दिया और डारेक्टर मैम का पुतला तक दहन किया गया परंतु जिन्होंने भी यह कार्य किया बहुत गलत किया बिना किसी की मजबूरी समझते हुवे ऐसा कार्य अनुचित था। परंतु समय को देखते हुए आज के समय में उस यूनियन का आज के समय मैं कोई भी अस्ति तुव  नहीं हैं। इसमें मजबूरी दोनो और से थी जो कर्मचारी निकाले गए थे उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए यह कार्य किया। अगर देखा जाए तो इसकी जिम्मेदारी भी  थोड़ी बहुत खुद हमारी डेरेक्टर मैम है अगर वो सबको समानता से निकलती तो शायद यह सब नहीं होता।




अब मैं सिर्फ एक बात आपको कहना चाहता हूं अगर हमारी डायरेक्टर मैम को कर्मचारियों को निकालना ही था तो सभी को निकालते क्युकी सब कर्मचारी उनके लिए एक समान है आपकी इस बात का मतलब क्या समझे हम लोग कहा गलत है। अगर नियमों की बात की जाए तो आपके लिए सब एक हैं और सबके लिए एक ही नियम होना चाहिए।अब मैं आप सभी लोगो से जानना चाहता हूं हमारी गलती बस इतनी सी है हम लोग उस समय यूनियन में शामिल नहीं हुए । यहां तक की जो 20, 25 वर्षों से यहां पर कार्य कर रहे थे उनको भी निकाला गया कुछ को चेतावनी देकर कुछ को बिना बोले। अब बात की जाए अगर पुरानी यूनियन की तो उनका कहना है जब कंपनी पर बदली गई तब हमें क्यों नहीं निकाला गया हमें क्यों रखा गया इसका निर्धारण करने का अधिकार सिर्फ संस्थान को है ना कि उनको मेरी ऊपर कहीं हूवि बात से आप दोनो मैं अंतर समझ गए होगे। परंतु हमारी डायरेक्टर मैम के द्वारा किए गए इस भेदभाव का क्या कारण है? अगर यूनियन के आदमी काम कर रहे हैं वह पुराने हैं जिनको को निकाला गया वो भी बहुत पुराने थे।




यहां तक की यहां तक की बजट ना होने के कारण एफ आर आई ने अपने संविदा कर्मचारियों की अगस्त की तनखहा भी नहीं दी हे और ना ही जूनियर सर्च फॉलो की दी है।





अब अगर बात सरकारी भर्ती की  जाए तो ज्यादातर भर्तियों में घोटाला ही सामने आया है अब इसकी जिम्मेदारी किसकी है किसी को नहीं पता आज तक जब भी एफ आर आई मैं जो भर्ती होती उसको वो एस एस सी के अंतर्गत क्यूं नही करता इसकी वजह क्या है ?




अगर बात  यूनियन वालों की की जाए तो आज के समय में जितने भी वन अनुसंधान संस्थान मैं यूनियन के कर्मचारी हैं वह समय पर कार्यालय नहीं आते और कई दिन  नहीं भी आते उसके बाद भी वह अपने हस्ताक्षर करके कार्य किए बिना कार्य किए बिना पूरी तनख्वाह ले रहे हैं हमारी डायरेक्टर  मैम को  यह बात नही पता  मैम ने आज तक किसी भी कार्यालय मै जाकर नहीं देखा वह क्या काम हो रहा है   कि वह कार्य कर रही है या रोज आ रहे हैं या नहीं मैं मैडम से प्रार्थना करता हूं एक बार पुस्तकालय में जाकर स्वयं देखें और कैमरे की रिकॉर्डिंग चेक करें खास तौर पर 13 सितंबर की उसमें भी यह हो रखा है वैसे तो कई बार यह काम हुआ है  एक यूनियन का कर्मचारी कार्यालय में नहीं आया और उसकी पूरी हाजरी जाए ना जानें कितने समय से यहां कार्य चल रहा है इसका मतलब तो हमें यही समझ में आता है किस जो यूनियन में नहीं था वही गलत था । अपने आपसे यही कहना चाहूंगा यूनियन वाले अपनी मर्जी से कार्य करें उनके लिए कोई रोक टोक नहीं है तो फिर हमारी गलती कहा है। इसमें सबसे खास बात यह है जो यूनियन वाले अभी ऐसा कर रहे हैं क्या आपको लगता है अगर वह 60 साल तक हो गए या परमानेंट हो गए तो वो काम करेंगे जो अभी नहीं करते ?






13 सितंबर की तारीख को ध्यान से देखे आप उपस्थिति तालिका में 13 सितंबर ममता गुरुंग नही आई है जब की मास्टर रोल में उनकी उपस्थिति लगी है इसकी क्या वजह है चाहे तो आप 13 तारीख मैं कैमरे की रेकोडिंग भी देख सकते हैं।


सितंबर महा मैं भी बहुत से लोगों ने कार्य किया परंतु बजट ना होने की वजह से बीच में निकल दिया गया अब मेरा यह पर्सन है उनको उनकी तनख्वाह कोन देगा अगर इसी तरह से देखा जाए तो यूनियन वालो को भी तनख्वाह नहीं मिलनी चाहिए।




समानता का अधिकार (right to equality)

 हमारे देश भारत में सभी के लिए समानता का कानून है इसके अंतर्गत हमारे समाज के सभी लोगों को समान अधिकार या प्रतिष्ठा प्राप्त होती हैं। जिसके  अन्तर्गत सुरक्षा, मतदान का अधिकार, भाषण देने स्वतंत्रता,  सार्वजानिक स्थान एकत्र होने स्वतंत्रता, सम्पत्ति का अधिकार, सामाजिक वस्तुओं एवं सेवाओं पर समान अधिकार आदि आते हैं। सामाजिक समानता में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने की समानता, आर्थिक समानता, तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा भी आती हैं। इसके अलावा समान अवसर तथा समान दायित्व भी समानता के अधिकार के अन्तर्गत आते है।


परंतु आज के समय में यह कार्य सही तरह से हो रहा हैं क्या ?


अगर वास्तविकता देखी जाए तो आज भी हमारा भारत देश कई वर्गों में बटा हुआ है जिसमें sc,St obc, उसके बाद जर्नर यह सभी वर्ग आते हैं और सभी वर्गों के लिए हमारे समाज में अधिनियम भी अलग-अलग हैं जिसके कारण चाहे वह सरकारी कार्य हो या फिर अन्य कोई कार्य इनमें भी वर्ग के हिसाब से छूट दी गई है और कार्य करवाया जाता हैं अगर यही हमारे देश में समानता का कानून है तो में इसको नही मानता हूं।



समानता का अधिकार होने के बाद भी हमारा भारत देश कई संप्रदाय में बटा है और उनके लिए हमारे देश में कानून भी अलग बने हुए है।







हमारे देश में सभी सरकारी भर्तियां गई इसे के अंतर्गत की जाती है जिसमें पहले sc st obc के बाद ही जर्नल वर्ग के अभियार्थियो का नंबर आता है जब हमारा देश एक है तो उसमे कानून भी एक ही होना चाहिए क्यों आज भी हमारा भारत देश एससी एसटी ओबीसी के नाम में बटा हुआ है और क्यों उनके लिए हमारे भारत देश में अधिनियम अलग हैं?


कई बार हमारे देश भारत में कभी जाति को लेकर संप्रदाय को लेकर किसी ना किसी कारण से झगड़े होते रहते हैं जब हमारे देश में सभी के लिए एक समान अधिकार है और कानून व्यवस्था की है तो ऐसा बार बार क्यों होता है कई बार राजनीति कारणों से तथा व्यक्तिगत होने वाले इन झगड़ों का मुख्य कारण क्या है आपने सोचा है कभी ?


अब बात आती हैं किसी भी सरकारी कार्यालय मै कार्य करने की उस में सभी सरकारी कार्यकर्मी सही तरह से कार्य कर रहे हैं? यह बात में सब के लिए नही बोल रहा हूं परंतु आज के समय में भी बहुत से कर्मचारी ऐसे ही जो अपना कार्य सही तरह से पूरा नहीं करते और पूरी तरह से संविदा कर्मचारियों पर निर्भर पर रहते हैं । अब बात आती है अब बात आती है सरकारी व संविदा कर्मचारियों की तो अधिकतर या देखा गया है कि भारतवर्ष के हर संस्थान मैं संविदा कर्मचारी कार्य कर रही है प्रत्येक कार्य हेतु सरकारी कर्मचारी संविदा कर्मचारियों पर निर्भर रहते हैं तब जाकर वहां कार्य पूर्ण रूप से होता है अगर हमारा अधिनियम देखा जाए तो एक सरकारी बहु कार्य कर्मी और एक संविदा कर्मचारी का कार्य समान है संविदा कर्मचारी को अपना कार्य पूर्ण रूप से करना पड़ता है अपने लिए और अपने परिवार के  भरण  पोषण के लिए। अगर बात बात सैलरी की की जाए तो एक संविदा कर्मचारी की तनख्वाह मुश्किल से 10 से 12000 के बीच में रहती है जबकि एक सरकारी बहु कार्य कर्मचारी की सैलरी 20 से 25000 के बीच में दोनों का कार्य समान होते हुए भी क्या समान कार्य समान वेतन का अधिनियम उन पर लागू नहीं होता। अगर इस चीज को आप समानता कहते हो तो मैं यह नहीं मानता कि यह समानता का कानून है ?




Problem that human faces

Tha world live in is ingrained social system that in all aspects of life be it professional or personal is male-dominated.A male-dominated society is bound to be following a patriarchal socity system where the rule makers are mostly man,and sadly there lies the problem.







The dicision-makers and the hierarchy below them are also man-dominated and hence women are not considered a part of society.and the rules  made only faver the man.not just India, the world is patriarchal ,but unfortunately India Today is now becoming a more ana more unequal society and unsafe and unharmonious place for women .in this essay on issues and problems faced by women india,we will dive deep in to tham and understand the causes and problems.it can be a short essay or a long chalenge women face today.thes will provide deeper insight in to the issue help us learn some ways to tackle the issues.







One of the struggles that underlies all of one policy bettles is the continued luck of women in position of power .from corporate bordrooms,to the coutrs and political leadership around the world ,the luck of women in senior positions country's to stymie progress on issues from pay to humanitarian aid to discrimian stion in all its froms.the sooner we understand that the luck of women leadership rules holds back not only women ,but all people ,the sooner we we'll be able to advance society as a whole.






Not only women faces lack in position of  power also major health issue that are not talked about,two of the most common cancer affecting woman are breast and cevrical cancer.detecting both these cancers early is key to keeping women alive and healthy.the letest global figures so that around half million women die from cervical cancer and half million  breast cancer each year.the vest majority of these deaths occur in low and middle income countries where screening.pervention and tritment are almost non-existent and where vaccination against humen papilloma virus needs to Tak holds.











Not only  physical health but also the mental health of a woman.evidance suggest that woman are more prone than to man experience anxiety , depression and somatic complaints-physical symptoms that cannot be explained madically.






Depression is the most common mental health problem for women and suicide a leading cause of death for women under 60.
Helping sensitive women to mantal helth issues,and giving them the confidence to seek assistance,is vital.



www.anoopkumars.com



Conclusion:  women are the more compassionate and empathetic than man and that often is considered as a sign of weakness ,man must realize patriarchy and the ego that does no good by women is not helping then editor.woman have so many issues that we can not articulate and they are facing so much without completing so there should be a collective effort by everyone to support women if thay have a problem and fight against the wrong-doers for justice and equality .and also encourage young girls to skeep up if any issue arises without fear.equality for work contribution and pay must a norm and at home.men at also contribution to the domestic chores.there is still a long way to go but we can go when we take a stap together......





हमारी जिम्मेदारी (our responsibility)





जिम्मेदारी एक ऐसा शब्द है जिसका अपने आप में ही बहुत महत्वपूर्ण स्थान है चाहे वह जिम्मेदारी किसी भी मनुष्य की अपने परिवार के प्रति हो या पति कि अपनी पत्नी के प्रति या मां-बाप की अपने बच्चों के प्रति या फिर किसी कार्यालय में अपने काम के प्रति अब सोचने की  बात यह है क्या हम इस जिम्मेदारी को ठीक प्रकार से निभा पा रहे हैं ?

आज के समय में हम प्रत्येक काम को लेकर एक दूसरे के ऊपर निर्भर है यह नहीं कर रहा तो मैं नहीं करूंगा इस भावना को अपने मन से निकालो क्योंकि जब तक हम स्वयं नहीं करेंगे तो हम दूसरे को भी नहीं बोल सकते कोई करे ना करें हमें अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभानी चाहिए। हमें अपना काम स्वयं करना चाहिए ना की किसी और के ऊपर निर्भर है अपने काम के लिए।



आज के समय में हम लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर लड़ना शुरू कर देते हैं इसका परिणाम सोचे बिना कई बार पति-पत्नी छोटी-छोटी बातों पर गाना शुरू कर देते हैं और  कई बार बात तक पहुंच जाती है जिसका दुष्परिणाम उनके बच्चों को भुगतना पड़ता है जिन्हें कभी मां बाप का प्यार ठीक से नहीं मिल पाता और हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है सोचो आज के समय में हम भी कहीं वही बड़ी गलती तो नहीं कर रहे हैं जिसका दुष्परिणाम हमारे बच्चों को भुगतना पड़े ।




क्यों हम छोटी-छोटी बातों को इतना बड़ा बना देते हैं बना देते हैं की बात तलाक तक पहुंच जाए हम जितने सहनशील होंगे हमारा परिवार भी सुखी रहेगा गलती दोनों से होती है परंतु कभी-कभी अपनी गलती ना होते हुए भी अपने वा अपने परिवार की खुशहाली के लिए हमारा चुप रहना ही उचित है।



आज के समय में हमारी युवा पीढ़ी झूठे प्यार मैं पड़कर अपने मां बाप और घर वालो को बात न मान कर चले जाते हे वह यह बात नहीं जानते की इसका परिणाम पुरे परिवार को भुगतना पड़ेगा  छोटी सी बात होने पर एक दूसरे को छोड़ कर चले जाते हैं या फिर लड़का लड़की को धोखा देकर भाग जाता हैं और  पूरे पैसे भी साथ ले जा लेते हैं इसमें दोनों हो सकते हैं और यह बात में दोनों के लिए कह रहा हूं इसमें दोनों हो सकते हैं ।



मेरे विचार से भाग कर शादी करना कोई बड़ा गुनाह नहीं है लेकिन वह तभी करो जब आप अपनी जिम्मेदारी को निभा सको अगर आप लोग भागकर शादी भी करते हो तो अपनी जिम्मेदारियों को समझो और आने वाले 5 साल के बात आपको कोई या ना बोले कि आपने गलत किया अगर आपके घर वाले आपको देखते हैं तो उन्हें भी या नहीं लगना चाहिए।



कभी भी गुस्से में आकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मत मोड़ो गुस्सा में एक बार आता है लेकिन जिंदगी हमारी पूरी बर्बाद होती है।


हमारे जीवन समस्या (problam)

 हमारा जीवन नियमित रूप से चलता है कई बार हमें जीवन यापन करने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पता है।  जो हमारे जीवन की गतिविधियों में रुकावट का कार्य करती है समस्या कई तरह की हो सकती है जिसमें  ज्यादातर आर्थिक समस्या होती है बाकी और भी समस्याएं हैं जैसे बेरोजगारी महंगाई परिवार के किसी भी सदस्य हैं लगातार बीमार रहना कुछ समस्याएं हमारे निजी जीवन से भी संबंधित रहती है।







आर्थिक समस्या सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब परिवार और मध्यम परिवार को पड़ता है जिन्हें दो पल की रोटी कमाने के लिए प्रतिदिन कार्य करना पड़ता है यदि वह कार्य ना करें तो कई बार उनके घरों में खाना तक नहीं बनता।




बेरोजगारी सन 2020 मैं हमारे देश में तथा पूरे संसार में करोना वायरस एक बीमारी आई थी जिसने सभी देशों की अर्थव्यवस्था हिला कर रख दी इसी बीमारी के दौरान बहुत से लोगों ने अपना रोजगार खोया लगातार खोते जा रहे हैं जिससे उन्हें अपने परिवार का भरण पोषण करने में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और ऊपर से लगातार बढ़ती हुई महंगाई नहीं आम आदमी की कमर तोड़ दी है निरंतर करती हुई इस महंगाई का जिम्मेदार कौन है ?








बहुत से हमारे बहुत से साथियों का कहना यह है कि महंगाई के साथ-साथ हमारी सरकार ने हमारी तो उनका भी बढ़ाई है मैं उन सबको यह बताना चाहता हूं कि किसी भी दुकान मॉल में या किसी भी कंपनी में कार्य करने वालों की सैलरी शुरुआत में 10 से 15000 के बीच में होती है और कहीं-कहीं पर वह भी नहीं मिल पाती ऐसे में आम आदमी क्या करें अगर महंगाई की बात की जाए तो वह निरंतर बढ़ रही है जहां पहले गैस ₹300 की मिलती थी वही गैस आज के समय मै 1000रुपए से पार पहुंच गई है ही पेट्रोल डीजल की बात करें उनके दामों में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है खाने के तेल से लेकर सब कुछ महंगा हो गया है अब हम बात करते हैं यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के साथ किराए के घर में रह रहे हो उसकी दिनचर्या क्या होगी 5000 तो उसे कमरे का किराया देना पड़ता है बिजली पानी का अलग और बच्चों की ट्यूशन की स्कूल फीस से लेकर कॉपी किताबों का खर्चा अलग खाने पीने का अलग आप ही सोच लो कल को क्या बचा ले जा अपने लिए। जिस की तनखा ₹15000 हो बाकी 10,000 वालों की तो बात ही छोड़ो आप

अगर किसी ये नोकरी भी छूट जाए तब  क्या होगा ?




 आज के समय मै हमारा भारत मंहगाई के मामले में 7 पे है अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही अब वो दिन दूर नहीं जब जब हमारा देश मंहगाई के मामले में नंबर 1 होगा।




अगर महंगाई लगातार इसी गति से बढ़ती रहे तो आप स्वयं समझते हैं आने वाले समय में गरीब परिवारों और मध्यम परिवारों का क्या होगा।





आज के समय में हर किसी के जीवन में हर किसी के जीवन में कोई ना कोई समस्या है लेकिन इन समस्या की सबसे बड़ी वजह निरंतर बढ़ती हुई महंगाई और पर्याप्त मात्रा में रोजगार का ना होना है।